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Friday, August 8, 2008

मद्धिम होते गांधी

15 अग्स्त नज्दीक आ रहा है, अखबारो मे विभिन्न सन्स्थाओ की उपस्थिति दर्ज होगी साथ मे महात्मा गान्धी (बापु) की चर्खा पर सुत काटते एक तस्वीर भी होगी, Happy Independence Day.. का एक बडा स्लोगन होगा. गान्धी वादी समाजवाद से दुर दुर तक रिशता न रखने वाले गान्धी के आदर्श पर चलने (छ्लने) की बात करते है. शायद यह इसलिए की आज भी लोगो को लगता है कि बापु की तश्वीर लगाने से ही सही होने का सर्टिफिकेट मिल जाता है(मायावतीजी से माफी चाहता हुं).

आज कल टीवी पर एक और बापु(आसारामजी बापु) बहुत ही धुम मचा रहे है, इनके आश्रम के चर्चे टीवी/अखबारो की सुर्खियां बटोर रहे है .मानव बली,सेक्स,रासलीला, गर्भवती लडकिया तमाम बाते निकल कर सामने आ रही है. "बापु "शब्द अपनी निर्मलता ,गरिमा खोता जा रहा है.इन आडम्बरी बाबाओ ने "बापु "शब्द को मलीन कर दिया है.

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