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Monday, August 30, 2010

बलखाती यमुना

करीब सात साल से यमुना के किनारे से होकर रिंग रोड से अपने ऑफिस जाता हूँ . कभी कभी ही ( केवल बरसात के कुछ दिन ) अहसास होता है की एक पुराणिक नदी के किनारे किनारे जा रहा हूँ . इन दिनों भी यही अहसास हो रहा है , यमुना वाकई नदी बन गयी है , उफान लेती हुई नदी , बलखाती हुई नदी , अभिमानी नदी , स्वाभीमानी नदी. आज कल यमुना को देख एक नदी का एहसास होता है.














(सबसे नीचे को छोड़कर सारी तसवीरें बस अड्डा , चंदगी राम अखाड़े से ली हुई है )

7 comments:

राज भाटिय़ा said...

अति सुंदर चित्र ओर बहुत सुंदर अहसास जी, धन्यवाद

Ashish (Ashu) said...

सच तो ये हैं कि कई जगह नदिया नाले के रूप में हो गयी हैं

Ashish (Ashu) said...

सच तो ये हैं कि कई जगह नदिया नाले के रूप में हो गयी हैं

कविता रावत said...

Bahut khoobsurat tasveer

Rahul Singh said...

गैर दिल्‍लीवासी को ऐसी ही यमुना की कल्‍पना होती है.

Vijai Mathur said...

Mritunjay ji,
kya yamuna aur kya ganga gomti sabhi nadiyon ka ek hi haal hai.nadiyon ki safai ab nahin hoti,pahle to delhi se kolkata tak jal marg se vyapaar hota tha.

trekking in india said...

ur blog really nice keep it up. frnd

 

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