आस्था का सैलाब , NH-8 Delhi
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आस्था का सैलाब ,NH-8 Delhi
वाकई वक्त के साथ हर चीज ,हर बात ,हर याद धुंधली होती जाती है .....हर सिलसिला कम होने लगता है ,...या तो नई बातें जुड़ती है या हम घटते घटते दुसरी दुनिया में कही खो से जाते है .............................. दिन ,महीने ,साल क्या सदिया गुजर जाए ..............................................
Posted by Mrityunjay Kumar Rai at Wednesday, September 15, 2010
1 Comment:
ऐसे भी सोच कर देखो................
ये आस्था का सैलाब नहीं है हिन्दुस्तान की बैंड बजाने के लिए फ़ौज तैयार हो रही है
हर साल ये रोड पर आकर अपनी ताक़त आंकते है और इस से ये जाहिर होता है कि
हम बढ रहे है
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