चिड़िया चिड़िया चिड़िया
10 hours ago
वाकई वक्त के साथ हर चीज ,हर बात ,हर याद धुंधली होती जाती है .....हर सिलसिला कम होने लगता है ,...या तो नई बातें जुड़ती है या हम घटते घटते दुसरी दुनिया में कही खो से जाते है .............................. दिन ,महीने ,साल क्या सदिया गुजर जाए ..............................................
4 Comments:
a good capture... KODAK MOMENT
अपने यहाँ विक्रेता ही सब तय करता है.
अजी एक गोलगप्पा तो पेक कर दो, हम अपनी पलेट मे खा लेगे घर जा कर :)
@ राज भाटिय़ा
भाटिया जी यह तस्वीर मेरठ वाले कांफेक्सनर , मुखर्जी नगर दिल्ली की है . दूकान बहुत अच्छी है और खूब चलती है , पर दूकान के मालिक की यह बात मुझे पसंद नहीं आयी , आखीर एक प्लेट पैक कराने वाला कहा जाए .
SOCIAL RESPONSIBILITIES की बात हमारा कॉर्पोरेट सेक्टर खूब करता है , पर अमल कितना होता है तस्वीर देख के पता चलता है .
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