Pages

Tuesday, August 25, 2009

गीत हमने दो लिखे

गीत हमने दो लिखे
विरह के, मिलन के
एक गुनगुना न सका
एक गीत गा न सका

मीत तो मिले बहुत
जिन्दगी के सफर में
प्रीत भी जता न सका
और प्यारा पा न सका

जिन्दगी के पन्नें दो
पढ़ लिए कभी कभी
एक याद कर न सका
एक को भुला न सका

एक गुनगुना न सका
एक गीत गा न सका

(साभार : जगत नंदन सहाय )

0 comments:

 

Sample text

Sample Text