क्या महाराष्ट्र की सरकार नपुंसक है ?
शैतान को उसी की भाषा में जबाब चाहिए .
वाकई वक्त के साथ हर चीज ,हर बात ,हर याद धुंधली होती जाती है .....हर सिलसिला कम होने लगता है ,...या तो नई बातें जुड़ती है या हम घटते घटते दुसरी दुनिया में कही खो से जाते है .............................. दिन ,महीने ,साल क्या सदिया गुजर जाए ..............................................
Posted by Mrityunjay Kumar Rai at Friday, October 24, 2008 0 comments Links to this post